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कैसे दे चीन को सह और मात ---डॉ अलका पांडेय



कैसे दे चीन को सह और मात 
आओ करे कुछ दिल की बात ....
मेरा दिल तो कहता है चीन का पूर्ण रुप से बहिष्कार करो और मात दो , पर कहावत है जोश से नहीं होश से काम लो .. 
गलवान घाटी में चीनी सेना द्वारा किए गए हमले के बाद से भारत में रोष का माहौल है.इसके बाद से देश में चीनी वस्तुओं के बहिष्कार करने का दौर शुरु हो गया है.
चीनी वस्तुओं के बहिष्कार करने का निर्णय लिया है. कैट ने ‘भारतीय सामान-हमारा अभिमान’ नाम से अभियान की शुरूआत की है.भारतीय व्यापारी संघ ने चीन से आने वाले कॉस्मेटिक,बैग, खिलौने, फर्निटर, जूते-चप्पल सहित कई ऐसे करीब 500 सामानों की लिस्ट तैयार की है जो अब भारत नहीं लेगा और चीनी सामानों का बायकॉट भी करेगा.
स्वदेशी एजुकेटर बनकर स्कूलों और कॉलेजों में जाकर बच्चों-युवाओं और अलग अलग मंचों से लोगों से स्वदेशी को अपनाने के लिए बात करेंगे. वहीं उन्हें इसके फायदे समझाएंगे.’ उन्होंने कहा स्वदेशी एजुकेटर के लिए किसी विशेषता की जरूरत नहीं है, कोई भी अपनी स्वेच्छा से बन सकता है.’
फिलहाल चीन के सामान का बहिष्कार करना और भविष्य में हमें आत्मनिर्भर होकर विदेशी सामान नहीं खरीदने के लिए जागरुक कर रहे है.’
अपने आप को दुनिया की सबसे शक्तिशाली समझने वाले चीन का गुरुर अब टूट चुका है. गलवान के बाद चीन समझ चुका है कि इस बार भारत से भिड़ना उसके लिए घाटे का सौदा साबित होने वाला है. नए भारत ने कैसे चीन को अब तक हर मोर्चे पर मात देने की तैयारी कर ली है. आइए अब आपको सिलसिलेवार ढंग से बताते हैं.

अपने पथ पर अग्रसर भारत
चीन भले ही जितना विरोध करता रहा, लेकिन भारत ने अपना निर्माण कार्य नहीं रोका. इतना ही नहीं, भारत सरहदी इलाकों में चीन की चुनौती से निपटने के लिए बुनियादी ढांचा मजबूत करने में भी जुटी है और इसीलिए मोदी सरकार ने भी इसे अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है. इसमें सिर्फ सड़क निर्माण ही नहीं है, बल्कि दूसरी जरूरतों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. 
कूटनीति से चीन का घेराव
भारत अमेरिका की दोस्ती चीन के लिए एक बड़ा सिरदर्द है. अब वही अमेरिका भारत के साथ आ गया है. पोम्पियो ने साफ तौर पर भारत का साथ देने की बात कही है, तो वहीं ऑस्ट्रेलिया भी भारत का साथ दे चुका है. चीन इस वक्त दुनिया में पूरी तरह अकेला पड़ चुका है. ऐसे में भारत के साथ भिड़ना उसके लिए बड़ी मुसीबत ही लेकर आएगा.
युद्ध नीति कहती है कि दुश्मन पर ऐसी जगह चोट की जानी चाहिए, जहां सबसे ज्यादा दर्द हो. चीन के मामले में ये चोट अर्थव्यवस्था पर होगी. गलवान घाटी में चीन के साथ हुई हिंसक झ़ड़प में भारत के 20 सैनिकों की शहादत के बाद पूरे देश में चीन के खिलाफ गुस्सा भड़क उठा  लोग चीन के सामान के बहिष्कार की मांग कर रहे हैं. सरकारी क्षेत्र से लेकर निजी क्षेत्र तक चीन में बने सामान पर निर्भरता कम से कम करने की बात की जा रही है. भारत का लोकल चीन के ग्लोबल को परास्त करने की पूरी तैयार कर चुका है. चीन की अर्थव्यवस्था पहले से ही डांवाडोल है. अगर भारत में चीन के सामान का संपूर्ण बहिष्कार हो गया को चीन की अर्थव्यवस्था की कमर टूट जाएगी.
इसीतरह हम चीन को मात दे सकते है
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

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