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तुलसीदास काव्य महोत्सव।गांव अपना अबभी सुंदर- प्यारा है_gopal mishra

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गांव अपना अबभी सुंदर- प्यारा है  
 वहां शोर  का कोई नहीं पहरा है
 जुम्मन मियां के मुर्गे की वाग से
 मंदिर की घंटा के आवाज से
 ट्रैक्टर और चक्की की फट फट से, 
 अब होता नीत नया सवेरा है. 

 अब बैलों की जगह टैक्टर ने
 भले ही ले ली है फिर भी
 दरवाजों पर गोवंश का पहरा 
 और भैंसों का कतार मारकर 
मस्ति में पागुर का नजारा 
 बहुत ही सुंदर और न्यारा है.

 पूरब में सूरज की लाली से
 चमकती गेहूं की बालियां, 
 धान के सुनहरे चमकते दाने
 लहलहाती धरती की हरियाली
 गोधूलि के बीच बेसुरे गीत से, 
 सांझ पहर झींगुरों का सीत्कारा है. 

 बुदबुदाते दुपट्टा समेटे हुए
 मंदिर के तरफ भागते पुजारी
 मोटरसाइकिल पर लादे बाल्टी
 दूध की, शहर जाता बनवारी
 ठेले या सिर पर लादे खोमचा
फेरहा सबकी करता वारा न्यारा है. 

 अब भी लोग मिलते हैं वैसे
 कोई भेदभाव नहीं हो जैसे
 धर्म जाति  की नहीं कोई लड़ाई
 ईद होली मिल बांटे मिठाई
 शहर से अलग अब भी गांव है
 किसी से नहीं कोई किनारा.
----गोपाल मिश्र, सिवान

156 comments

ARVIND AKELA said...

वाह,बहुत अच्छे।

विकास चन्द्र मिश्र said...

अनुकरणीय एवम स्वागत योग्य रचना

Unknown said...

सही है गांव में अभी भी लोगों के बीच में अपनत्व की भावना है

Unknown said...

Ati Sundar rachna

Unknown said...

सही है गांव में अभी भी लोगों के बीच भाईचारे की भावना है ना हिंदू ना मुस्लिम गंगा जमुनी तहजीब का उचित उदाहरण है अपना गांव

Unknown said...

Too good Sir

Unknown said...

गांव के जीवन का यथार्थ बताती हुई रचना
अति सुंदर।
सादर चरण स्पर्श।

Unknown said...

बहुत सुंदर रचना । गांव के जीवन शैली का सुंदर वर्णन ।

Unknown said...

Very nice lines

Unknown said...

बहुत सुंदर रचना

Dr Vinayak Mishra said...

बहुत सुंदर रचना

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

बहुत बहुत धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

ऊपर सभी को धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...
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गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...
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गोपाल मिश्र said...
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गोपाल मिश्र said...
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Unknown said...

Very nice lines sir

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

आप एक कुशल एवं योग्य अधिकारी के साथ एक बहुत अच्छे कवि भी हैं और हम सबके प्रेरणा स्रोत ।
माटी की सोंधी सुगन्ध बिखेरती इस श्रेष्ठ रचना के लिए आपको कोटिशः बधाई एवं सादर नमन sir.

Paramveer Singh said...

बहुत सुंदर रचना
💐💐

Unknown said...

Bahut sunder sir jee

Unknown said...

आपकी इस साधना पर माँ सरस्वती की कृपा सदैव बनी रहे। ------ बाल कृष्ण मिश्र

Unknown said...

प्रकृति की अनोखी छवि का उत्कृष्ठ रचना ।
अविस्मरणीय सारगर्भित

Unknown said...

Ati sundar sir ji

Unknown said...

गांव की सुंदर छवि उत्कृष्ट रचना

Unknown said...

Ati Sundar Rachna Sir Ji

अजय मौर्य said...

शानदार रचना सत्य का स्मरण कराती हुई

Unknown said...

Gaun ki sachchi tasveer
Very nice sir

AJAB SINGH said...

गांव की सत्यता को बयां करती बहुत ही सुंदर रचना एक पल रचना को पढ़ते हुए गांव की स्मृति कुछ पल के लिए मस्तिष्क में घूम गई क्योंकि आज भी मैं पूरी छुट्टियां गांव में ही बिताता हूंl

Unknown said...

ग्राम के चरित्र का सजीव चित्रण,, मनोहर शब्दों का चयन गाँव की सरल जीवन शैली की ओर आकर्षित करती है।

Unknown said...

द्वारा--आनन्द सिंह

Unknown said...

बहुत ही सुंदर रचना सर्,गांव का बहुत अच्छा वर्णन।सादरप्रणाम।

Unknown said...

जगदीश वर्मा टेउवा ग्रान्ट

Unknown said...

अब भी लोग मिलते हैं वैसे भेद भाव नहीं हो जैसे अति सुन्दर रचना

Unknown said...

बहुत सुंदर रचना सर जी

Unknown said...

बहुत ही सुन्दर रचना।

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

बहुत सुन्दर, धन्यवाद

Unknown said...

Utkrusht Rachna

Unknown said...

100% सत्य अनुभव; सुंदर चित्रण👌🙏🏼

Unknown said...

शानदार अति सुन्दर रचना

Unknown said...

Very good sir

Unknown said...

Shandar Rachna Sir Ji

Samarjeet Singh said...

अत्यंत सुंदर रचना

Manoj pathak said...

बहुत ही सुन्दर, सजीव, और ह्रदयस्पर्शी रचना सर जी🙏🙏🙏

Unknown said...

Ati sunder n pranam sir ji

Unknown said...

अतिसुन्दर

Unknown said...

खुशहाल भारत की कल्पना।अति उत्तम रचना।।,💐💐🙏

Unknown said...

अतीत से वर्तमान का सुंदर वर्णन

Unknown said...

बहुत खूब
इस धूप जिन्दगी में साहित्य की छाव हो
नहले पे दहला यदि वहा अपना गाव हो
विपिन मौर्य

Unknown said...

प्रणाम सर🙏बहुत ही सुन्दर रचना...

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

गांव का मनोरम वर्णन सर जी

Unknown said...

आदरणीय महोदय सादर प्रणाम!
उक्त सजीव रचना हमें गांव के शुद्ध वातावरण और दैनिक क्रियाकलापों का एक सजीव चलचित्र का आभास कराती है ।
महोदय! आप के द्वारा प्रयुक्त किये गए शब्द सामग्री चेतना पटल पर घर कर जाते हैं । मन प्रफुल्लित हो जाता है ।
इस मनोरम कृति के लिए हृदयतल से धन्यवाद 🙏
माँ सरस्वती की कृपा आप पर बनी रहे ।
आपका स्नेहाकांछी-
सुजीत कुमार यादव (सo अo)टेउवा खालसा

गोपाल मिश्र said...

बहुत बहुत धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

सुन्दर रचना

Vinita Singh said...

अति उत्तम

Unknown said...

Bahut hi achhi Rachana.

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

Very nice sir

Unknown said...

Sir Aap ki Rachana ne mn moh liya

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Samarjeet Singh said...

अति सुंदर

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

BEO ITWA said...

Very Nice, Sir, ��

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

Sir this is very heart touching and creative

Gopal said...

बहुत ही सुंदर रचना सर् जी

Unknown said...

ग्रामीण परिवेश का सुंदर वर्णन

गोपाल मिश्र said...

बहुत बहुत धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

Nice lines sir

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

अति सुन्दर सर।

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

बहुत सुन्दर सर

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

बहुत सुंदर कविता, एक अच्छी कविता सिर्फ वहीं लिख सकता है जिसके पास साहित्यिक शब्दो का ज्ञान हो।

Unknown said...

अनुकरणीय और मार्ग दर्शक

Unknown said...

बहुत ही खुबसुरत रचना , शब्दो का अच्छा संयोजन

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

अति सुंदर

Shubhankar said...

अति सुंदर

Rituja said...

बहुत अच्छा कविता है

Anonymous said...

सुंदर रचना

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Deshant said...

Awesome

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Prashant said...

अच्छा है

Anonymous said...

बढ़िया कविता है

गोपाल मिश्र said...

Dh

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

विकास चन्द्र मिश्र said...

खूबसूरत पंक्तियां सर, निःसंदेह गांव की स्मृतियों को जीवंत बना दिया ।

Unknown said...

गांव के जीवन का यथार्थ बताती हुई रचना
अति सुंदर।
सादर प्रणाम

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

बहुत बहुत धन्यवाद एवम सादर प्रणाम सर जी

Unknown said...

का

Unknown said...

का

Unknown said...

ग्रामीण जीवन का अनुपम चित्रण।

Unknown said...

अनुकरणीय एवम प्रेरणादायक कविता सर जी

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

बहुत ही सुंदर आत्मा को संतुष्ट कर देने वाली कविता

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

jaydubey said...

Thank

jaydubey said...

बहुत खूब
सुरत

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

ग्रामीण जीवन शैली पर उत्कृष्ट रचना ।

Unknown said...

Very nice sir ji.

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

Unknown said...

गांव के बारे में यह रचना बहुत ही सटीक संजीव सुन्दर तथा हृदय स्पर्शी है।

Unknown said...

बहुत ही सुन्दर रचना

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद

गोपाल मिश्र said...

धन्यवाद