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गोस्वामी तुलसी काव्य प्रतियोगिता।शिखा गोस्वामी_saahity

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गांव बहुत याद आता है।

प्राकृतिक सुंदरता का मेरा गांव,
हर पल हमें लुभाता है।
शहर की चकाचौंध में भी,
गांव बहुत याद आता है।

मिट्टी से लिपटा बचपन,
ताल तलैया सुहाता है।
वट के नीचे, यारो संग,
बेर खाना याद आता है्‌।

हरियाली से आच्छादित बावली,
जहां वन में मोर मंडराता है।
गांव के मनमोहक महक से,
मन भी महक महक जाता है।

गांव की वह चौपाल जहां पर,
बुजुर्गो का मेला जमता है।
हर आने जाने वालों पर,
चौकन्नी नज़र रखता है।

गांव की बेटी,हर घर की बेटी्,
आशिष सभी का मिलता है।
जिससे जैसे बन पड़े,
बेटी को वह देता है।

किसी के दुःख सुख में,
सारा गांव उमड़ता है।
अपने अपने तरीके से,
हरसंभव सहायता करता है।

यहां पर स्थित माता का मंदिर,
रह-रह कर हमें बुलाता है।
मां महामाया का अनुपम रुप,
मां का चौखट याद आता है‌।

प्रसाधनों की अनंत चाह में,
गांव को पीछे छोड़ गए।
जीवन के इस भाग दौड़ में,
शहर के होकर रह गए।

मेरे गांव की सोंधी महक,
अब भी हमें रिझाती है।
गांव वालों का अपनापन,
गांव में फिर बुलाती है।

करते सभी खेती किसानी,
शाक भी उगाया जाता है।
हर घर में यहां के सदस्य रुप में,
गाय,बैल पाया जाता है।

पढ़ने को हर बच्चा यहां का,
सरकारी पाठशाला जाता है।
शिक्षा के साथ संस्कार भी,
जहां उन्हें सिखाया जाता है।

गुल्ली-डंडा, कबड्डी,खो खो, क्रिकेट,
खेल यही खेला ‌जाता‌ है।
फिर गांव के सारे बच्चों को,
मैदान में थकाया जाता है।

किसी के घर भी खा लिया,
बच्चा ‌कही भी सो जाता है।
शांत, सुरम्य वातावरण का,
गांव बहुत याद आता है।

इतने वर्षों बाद भी,
मन वहीं लौटना ‌चाहता है।
भूले बिसरे लम्हों को,
समेट लेना चाहता है।

गांव की वह बारिश की बूंदें,
कागज का नाव याद आता है।
शहर की चकाचौंध में भी,
गांव बहुत याद आता है।




लेखिका
शिखा गोस्वामी
मारो (छत्तीसगढ़)

42 comments

Khwab said...

Very nice line

Anonymous said...

बेहतरीन

Unknown said...

अति सुंदर कविता

Pankaj said...

Bahut hi piyara kavita hai
Gaov me gujare huye lamhe yaad aane lga

Ambikesh said...

बहुत ही सुंदर कविता, शिखा

Unknown said...

Bahut hi achha likha hai. Ma Saraswati ka ashirwaad tum pe sada bana rahe.

Unknown said...

अतिप्रिय

Unknown said...

Very well written shikha.well done🌺

Unknown said...

बहुत बहुत शून्दर् कविता है आपकी शिखा जी🙏

The Institute of Engineers(India) said...
This comment has been removed by the author.
Nitin Goswami said...

Bahut hi sunder...

Unknown said...

Very nice line������❤️❤️❤️

राजेश गोस्वामी said...

बहुत ही सुन्दर कविता उस से सुन्दर आपकी सोच है

Avinash said...

Well done shikha

Avinash said...

Bahut achha

DATT PRAKASH said...

मेरे गांव की सौंधी महक अब भी हमें रिझाती है,,,,,
बहुत बढ़िया शिखा
लेखनी अनवरत चलती रहे,, शुभकामनाएं

Unknown said...

बहुत बढ़िया क्या बात है

Mukesh sinha said...

very nice 👌👌

Khushboo said...

Beautiful poem❤️❤️

Unknown said...

बहुत सुंदर कविता लिखी हो शिखा तुम्हारे जैसी होनहार बेटियां और बेटे हमारी गांव की शान है ❤️👍

Anonymous said...

बहुत सुंदर ,��❤️��

Ravi said...

Very Very Nice Super Se Uper

Ravi said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

Bahot hi acha aur manmohak

Unknown said...

Jo lines apne likhi hai hr lines Mei schai hai very very nice shikha ji👌👌

tarun said...

अद्भुत

Unknown said...

बेहतर को बेहतरीन बनाने में, कसर ज़रा न तुमने छोड़ी ।
कष्टों को कर बेअसर, खुशियों को समा में तुमने जोड़ी।

बहुत ही सुंदर💖 कविता लिखी है आपने 👌👍🔥🔥🔥

Som said...

प्रशंसनीय

Unknown said...

अति सुन्दर कविता 👌👍🙏🙏

Danendra Puri Goswami (Raja) Kawardha said...

बहोत ही सुंदर कविता������

Unknown said...

बहुत सुंदर कविता

Unknown said...

Veri nice poem

Unknown said...

Very Nice

Avi said...
This comment has been removed by the author.
Manish Giri goswami said...

Very nice. Best of luck

Gagan goswami said...

Bahut hi achhi kavita hai pura gaon ke bare m bahut achhe se btaye hai

Unknown said...

Absolutely mind blowing dear ❣️🤗😍😍

Unknown said...

Bahut badhiya didi 👌👌👌🥰
All the best

Unknown said...

Nice line

Unknown said...

After reading this poem I feel the reality of life for those people who are living in Cities & basically belongs to Rural areas...
very appreciative poem.... Good Luck!

Unknown said...

Very nice....

Unknown said...

Bahut hi manmohak kavita hai