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पढिये सीताराम पवार जी की प्रेम रस से डूबी रचनाये-sahitykunj

 

*सौ इंकलाब लेकर चल*

"ठोकरें खाकर गुनगुना ही तो असली जिंदगी है यारों"

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चल इजहार के इस सफर मे चल गुलाब लेकर चल


चल बहार के सफर में चल अब ये शबाब लेकर चल।


कामयाबियों के सफर में खुद को संभाल कर चलना


चल सवालों के इस सफर में चल जवाब लेकर चल।


चल जरा सा हटके चल यहां जमाने की रवायत से


चल गमों के इस अंधकार में यार चिराग लेकर चल।


जो आगे बढ़ते हैं जमाने में अपने मजबूत इरादों के बल पर


चल अपने इस टूटे दिल में जिंदा ख्वाब लेकर चल।


तीरगी के ये सफर में कई गुमनाम हो गए इस जहां मे


चल ये तीरगी के सफर में चल आफताब लेकर चल।


माना की सूरज निकलने में समय लगेगा जरूर


चल इस सफर में चल मगर हाथों में यह महताब लेकर चल।


ठोकरें खाकर गुनगुनाना ही तो असली जिंदगी है यारों


चल तू अपनी एक ठोकर में सौ इंकलाब लेकर चल।


*सूनी आंखें ताकती रही*

"आखरी आरजू थी बस तुम्हें एक नजर देखने की उनकी"

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मोहब्बत की दुहाई दे तुम तो नफरत पर उतर आए


जिसे इस नेकी ने नकारा तुम तो बदी के सारे काम कर आए।


किसी की बात नहीं मानी तुमने अपनी मर्जी की की है


हमने छोड़े थे अमन के कबूतर तुम उनके पर कुतर आए।


हमारी आंखों में अरमानों के आंसू थे तुम इसे पानी समझ बैठे


हमने आबेहयात पीलाया था उन्हें तुम तो जहर पिला आए।


कभी इंद्रधनुष के सात रंग हमेशा उनकी आंखों में खिलते थे


तुम्हारी करतूत ही ऐसी हैं जो आंखों में काले रंग भर आए।


बरसो रास्ता निहारती रही  वह आंखें बंद हो गई अब तो


खंडहर बचा हुआ है यहां अब तो जिसके तुम घर चले आए।


वादा किया था कभी तुमने हमेशा साथ निभायेंगे उनका


वादा तोड़ दिया तुमने आखिर वो वादा करके मुकर आए।


आखरी आरजू थी बस तुम्हें एक नजर देखने की उनकी


सुनी आंखें भी ताकती रही मगर दूर दूर तक तुम नजर नहीं आए।


अपने अंदाज होते है*

"वह आशिकी ही क्या जहा आशिको का इम्तिहान ना हो"

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हर रोज हम तो आपकी इन हसीन यादों में खोते हैं


आपकी हसीन तस्वीर को हम आंखों में लेकर सोते हैं।


भीग ना जाए यह तस्वीर इन आंसुओं से कहीं


इसीलिए हम आंखों से नहीं इस दिल से रोते है।


दो दिलों को मिलाना खुदा की इबादत के समान है


कुछ लोग मिलाना तो दूर वो नफरत के बीज बोते है।


तुम्हारी बेवफाई ने दीये जो जख्म वह भी भरे नही


तुम्हारे दिए जख्मों को हम  आंसुओं से धोते है।


यह जरूरी नहीं गम में आंखों से आंसू निकलते है


अरे यार मुस्कुराती आंखों में भी सैलाब होते है।


खुद को फना करके भी जो दिलबर को दुआएं देता है


यह भी आशिकों के अपने-अपने अंदाज होते है।


हमें क्या पता था जिसको दिल दिया वो हरजाई होगा


उस हरजाई सनम के सीने में भी अनेक राज होते है।


वह आशिकी ही क्या जहा आशिको का इम्तिहान ना हो


सच्चे आशिक भी वही जो हर इम्तिहान में पास होते है।


सीताराम पवार

उ मा वि धवली

जिला बड़वानी

9630603339

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