Home Top Ad

कैसे दे चीन को मात --विचार गोष्ठी -विशाल चतुर्वेदी,मधु वैष्णव मान्या,पूजा सैनी ,गजेंद्र कुमार घोगरे, सिद्धेश्वर विद्यार्थी , रीतु प्रज्ञा,रेखा पारंगी , अमरेन्द्र कुमार मिश्र



कैसे दें चीन को शह और मात,
आओ करें कुछ दिल की बात।
🤜🤜🏹 
जय हिन्द वंदे मातरम मैं विशाल चतुर्वेदी " उमेश " आप सभी से चीन कि नापाक हरकतों के बारे में दिल की  बात करने आया हूँ । जैसा कि हम सभी जानते है हमें अपने पड़ोसियों से अच्छा व्यवहार करना चाहिए क्योंकि पड़ोसी हर सुख दुख में सबसे पहले आता है । परन्तु यदि पड़ोसी का व्यहार मानवता , समाज और संस्कारों के विपरीत हो तो कब तक हम संयम बरतें और बर्दाश्त करें । 
आज यही हाल हमारे पड़ोसी देश चीन का भी है । वह मानवता का दुश्मन,   कुटिल चाल चल रहा है । उसने अपनी कुटिल चालों से भारत ही नही अपितु पूरे विश्व को खतरे में डाल दिया और इस वैश्विक महामारी के समय में भी वाह सिर्फ अपने फायदे के लिए कोरोना वायरस से जुड़ी जानकारियों को विश्व पटल पर साझा नही कर रहा । इस कोरोना महामारी के समय में भी वह संवेदनहीन होकर , मजबूरियों का फायदा उठाकर अपनी अर्थव्यस्था मजबूत करने में लगा है । 
आजकल चीन हमारे देश कि सीमा का अतिक्रमण करने की ताक  में रहता है परन्तु हमारे वीर सैनिक उनकी हर चाल को अपनी बुद्धि और पराक्रम के दम पर नाकाम कर रहे हैं । 
यदि किसी शक्तिशाली व्यक्ति को हराना है तो सबसे पहले उसकी शक्ति क्षीण कर दो और उसकी शक्ति है उसका भोजन तो सबसे पहले उसका भोजन बन्द करने का उपाय करना चाहिए फिर उसकी मानसिक शक्ति पर प्रहार करना चाहिए ठीक उसी प्रकार चीन की शक्ति है आर्थिक ताकत , हमें सबसे पहले उसकी आर्थिक ताकत पर , अपनी पूरी ताकत से प्रहार करना चाहिए । इसमें सिर्फ सरकार को ही नही अपितु हम सभी देशवासियों को चीन द्वारा बने सभी उत्पादों का प्रयोग बन्द कर देना चाहिए । आजकल संचार क्रांति का वक्त है और सबसे ज्यादा उत्पाद चीन ही बनाता है उससे सिर्फ हमें आर्थिक हानि  ही नही अपितु सुरक्षा दृष्टि से भी सुरक्षित नही है अतः हमें उसका उपयोग किसी भी रूप में नही करना चाहिए ।  चीन की इन सभी कुटिल चालों का सिर्फ एक जबाब है चीनी उत्पादों का बहिष्कार , यदि हमने इस पर अमल किया तो वह आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएगा और फिर इसका असर उसके रक्षा बजट कम हो जाएगा ।
इसका असर उसकी रक्षाशक्ति पर पड़ेगा और जब वह दोनों मोर्चे पर नाकाम होगा तो उसे भी आटा दाल का भाव मालूम हो जाएगा । 

विशाल चतुर्वेदी " उमेश "
जबलपुर मध्यप्रदेश


कैसे दें चीन को शह और मात
🌹मत 🌹
हमारे पारिवारिक संबंधों में हम पड़ोसियों को बहुत मान सम्मान और इज्जत देते हैं और यही श्रंखला देश पर भी लागू होती हैं अभी वैश्विक महामारी के परिपेक्ष में अगर देखें तो अच्छे संबंध नहीं चल रहे हैं सरहद पर पाकिस्तान और चीन बार-बार परेशान करते हैं ऐसा लग रहा है कि फौजी भाइयों के हवन कुंड में आहुति से दिल बार-बार आहत हो रहा है मैं आर्थिक राजनीतिक  के बारे में तो नहीं जानती लेकिन मेरे फौजी भाइयों के शहादत को बहुत अच्छे से पहचानती हूं और जानती हूं नमन करती हूं।मैं यही चाहती हूं कि जब एक पड़ोसी इस तरह से बार-बार परेशान करे तो हमें उस पड़ोसी से आदान-प्रदान व्यापार पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए ताकि हम उसको बता सके कि हमारे सम्मान को तू हमारी कमजोरी मत समझ। 
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके चीन से व्यापार बंद करके और युद्ध नीति को टालकर, हमारे फौजी भाइयों की स्थिति को मजबूत बनाकर और स्वदेशी व्यापार की स्थिति उन्नत बनाकर हम चीन को शह और मात दे सकते हैं
       मधु वैष्णव मान्या
किसी देश को मात देने के लिए सबसे पहले अपने देश में एकता का भाव स्थापित करना होगा|
 क्योंकि देश लोगों से ही बनता है|
 लोगों के बिना देश नहीं बन सकता| भारत देश के लोग एकता से चीन की अर्थव्यवस्था का तख्तापलट कर सकते हैं|अगर चीन द्वारा उत्पादित किया जाने वाला कोई भी समान कोई ना खरीदे और और ना ही उसका समर्थन करें |चीन देश की अर्थव्यवस्था भारत देश के बलबूते पर आसमान की ऊंँचाइयों तक पहुंँची थी|अब  भारत के लोगों ने चीन की कंपनियों का बहिष्कार करके चीन की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंँचाया है| जिसके कारण चाइना में बेरोजगारी 20 फ़ीसदी तक बढ़ गई है| देश की अर्थव्यवस्था में युवाओं का बहुत बड़ा हाथ होता है| चीन के द्वारा उत्पादित मोबाइल का इस्तेमाल युवाओं द्वारा हो रहा है जो  युवाओं में चीन की कंपनियों के मोबाइल  के इस्तेमाल की जिद बन गई है|उन युवाओं को अपनी इच्छा को  नियंत्रित करना चाहिए| और भारत में उत्पादित  मोबाइल  को ही बढ़ावा और समर्थन देना चाहिए | चीन देश में भारत के सैलानियों का एक बहुत बड़ा तबका वहांँ घूमने जाता है
 अगर चीन देश में जाना ही बंँद
 कर दें तो  उनकी अर्थव्यवस्था और हम  सब मिलकर चीन को मात दे सकते हैं|

 पूजा सैनी नई दिल्ली
कैसे दें चीन को शह और मात
आज कोरोना संकट और चीन की विस्तार वादी के कारण भारत ही नहीं विश्व के बहुत से देश चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत ने चीन की इस नीति का लोकतांत्रिक ढंग से उत्तर देते हुए सर्वप्रथम चीन के सभी 59 एप पर प्रतिबंध लगाते हुए जिस तरह डिजिटल स्ट्राइक की है उससे स्पष्ट हो जाता है कि यदि हमारे देश के विरुद्ध चीन कदम उठाता है तो उसे इससे भी गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। राज्य सरकारों ने भी चीन के साथ किए गए करारों को रद्द करते हुए चीन के खिलाफ विरोध की आग में घी डालने का काम किया है। लद्दाख में चीन के हस्तक्षेप के कारण भारत ने सैन्य और कूटनीतिक कदम उठाते हुए कई देशों को चीन के खिलाफ खड़ा कर दिया है। हमारे नागरिकों ने चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने का जो सिलसिला शुरू किया है वह चीन की अर्थव्यवस्था को निश्चित ही पलीता लगाने का काम करेंगे। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं कि भारत अपनी राष्ट्रवादी नीतियों के कारण निश्चित ही चीन को मात देने में सफल होगा।
गजेंद्र कुमार घोगरे
स्नातकोत्तर हिन्दी अध्यापक
जवाहर नवोदय विद्यालय, वाशिम (महाराष्ट्र)
कैसे दें चीन को शह और मात
1962  वाला भारत समझकर चीन ने भारत की भूमि हड़पने का प्रयास करने का दुस्साहस किया । धोखे से हमारे 20 सैनिकों को भी मार दिया । यह दुखद घटना घटी  । शहीद सैनिकों को बिनम्र श्रद्धाजंलि । लेकिन हमारे सैनिकों ने भी 50 से भी अधिक सैनिकों को मारकर देशवासियों का मान सम्मान बढ़ाया है ।
     आज का बिषय के अनुरूप ही हमारे प्रधानमंत्री चीन को हर क्षेत्र मे शह और मात दे रहे हैं ।  जहाँ सिमा पर सैनिक चीन को जबाब दे रहे हैं , वही कुटनीति मे आज चीन को अकेला कर दिया है । ऐसी स्थिति मे चीन के को मात औऔर सिर्फ मात ही मिलना है । 
                सिद्धेश्वर विद्यार्थी 
" हम हिन्दुस्तानी कभी पीछे हटते नहीं,
विश्वगुरु बन जवाब देते रहे हैं सही।
हम  हिन्दुस्तानी हमेशा शत्रुओं को मुँह तोड़ जवाब देते रहे हैं।चीन जैसे धूर्त शत्रु को भी मुँह तोड़  जवाब देने की आवश्यकता है।हम उसे ऐसा सबक सिखाएं कि फिर कभी हमारे देश को ओर बुरी नजर से देखने की हिम्मत नहीं करें।उसके सभी बुरे मंसूबे पर पानी फेरकर धूल चटा दें। उसके साथ सभी तरह के रिश्ते तोड़ ले। राजनीति से हटकर देशहित कार्य करें। सरहद पर तैनात सैनिकों को छूट दिया जाए कि दुश्मनों के इरादों को चकनाचूर कर दें। अब संधि नहीं , सशक्त और शक्तिशाली बन  चीन को औंधे मुँह गिराए।सभी जगह चीनियों के सामन, एप्प इत्यादि पर सख्ती से प्रतिबंध करने की जरूरत है।उसे कान पकड़ने पर मजबूर कर दें ताकि फिर कोई गलती न करे।पुराने पद्धति को छोड़ककर नए कदम की ओर अग्रसर करें।हम हिन्दुस्तानी बल और बुद्धि से उसे मात दें ताकि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। हम सभी भारतवासी एकता के बंधन में बंधकर उसे परास्त करें।
" हम बनकर रहे माला,
तोड़े शत्रुओं के  ताला।

                रीतु प्रज्ञा
       दरभंगा, बिहार


कैसे दें चीन को शह और मात
मूलभूत सुविधाओं में सुधार एवं वृध्दि की जाए। चीन को सबक सिखाने के लिए उसकी प्रत्येक चाल सभी देशों के सामने लानी होगी।उसका दौहरा रवैया भंग करना होगा।छोटी आंख वाले को आईना दिखाना होगा।सुई से लेकर प्रत्येक वस्तु भारत की हो और प्रत्येक भारतीय उसे अपनाएं। चीन की ध्रवीकरण की नीति को समझ कर रणनीति बनाई जाए। हथियारों और जेट विमान समझौता आदि सभी उसके साथ भंग करना होगा। सम्मेलनों एवं  शिविरों में उसकी मौजूदगी को खत्म करना होगा। तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण को सुधारा जाएगा।तभी हम चीन को टक्कर दे पाएंगे।
स्वरचित एवं मौलिक।
रेखा पारंगी बिसलपुर पाली राजस्थान।

कैसे दें चीन को शह और मात
------------------------------------
       हमारा एक पडोसी मूल्क है चीन।चीन पहले तो हमारा मित्र राष्ट्र हुआ करता था पर आजादी के समय से मित्रता में कटुता आ गई है।इस कटुता के अनेक बजह है।
   अभी विश्व में चीन की जनसंख्या सबसे बडी है।वहां जनसंख्या अधिक है और संसाधन कम है।फलतः वहां के लोग अपनी आवश्यकता की प्रतिपूर्ति के लिए अगल बगल के संसाधनों पर कुदृष्टि रखते है।
      जबसे वहां द्वदात्मक भौतिकवाद का विकास हुआ है तबसे वह सिर्फ उत्पादन और वितरण तक उतरकर पूँजीवादी व्यवस्था का शिकार हो गया है।आज विश्व बाजार चीनी समानों से अटा-पटा है।यह भी एक बजह है उसे वैश्विक व्यापार जगत में काँटा बनने का।
        हमारा देश एक विकासशील देश है साथ ही सहिष्णु भी है।यहां के लोग विश्वबंधुत्व की भावना का कद्र करते रहे हैं।पर जो अभाव ग्रस्त होता है उसे दूसरे के दर्द से लेना देना नहीं होता।वह हडप और झडप नीति का सहारा लेता है।
   पूर्व में भारत सरकार उसके कुटिल कुटनीति को समझ नहीं पाई।वह अपने पडोसी को भाई की संज्ञा दी पर वह घातक साबित हुआ।'हिंदी चीनी भाई-भाई' का नारा छलावा साबित हुआ।और वह चीन हमारे हक की हकमारी बरीआरी करता रहा है।
     इसी वजह से हमारे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री साजिश के शिकार हए।आये दिन हमारे जांबाज सिपाही असमय काल कवलित हुए।अब हम सबको उसके छद्म भाईचारे को समझना होगा।और उसी के भाषा में हमें जबाव भी देना होगा।
     जबतक हम 'जैसे को तैसा' वाली नीति नहीं अपनाते हैं तबतक देश का कल्याण नहीं होगा।आज जो हमारी सीमा पर शह और मात का खेल खेला जा रहा है वह हमारी संप्रभुता पर चोट है।
      आईये हमसब मिलकर इस समस्या का उचित समाधान के तौर पर ईंट का जबाब पत्थर से सिखें।तभी वह शह मात के खेल में मात खायेगा।
                 अमरेन्द्र कुमार मिश्र 
              पथार गडहनी भोजपुर